हमारे बारे में

1985 में स्वतन्त्र विभाग के रूप में गठित, यह बच्चों एवं महिलाओं के सर्वांगीण विकास से सम्बन्धित है। विभाग के विविधतापूर्ण कार्यक्षैत्र को दृष्टिगत रखते हुए, 2008 से इसके अर्न्तगत निम्नानुसार 2 निदेशालय सृजित किये गये जिसमें बाल विकास से लेकर, महिला सशक्तिकरण, पोषण, बच्चों व महिलाओं के विरूद्व हिंसा के प्रकरण एवं अन्य सम्बन्धित विभागों के साथ संचालित समन्वयन कार्यक्रम संचालित है:-

1.            निदेशालय समेकित बाल विकास सेवायें

2.            निदेशालय महिला अधिकारिता

माननीय मुख्यमन्त्री महोदय के कुशल मार्गदर्शन में एक जींवत विकास का दौर परिलक्षित है, जिसमें कल्याणकारी योजनाओं एवं पोषाहार कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाआंे और बच्चों के विकास पर विशेष जोर दिया गया है।

महिला एवं बाल विकास विभाग ने सवर्था महिलाओं, बच्चों व किशोरियों के कल्याण को सुनिश्चित किया है। इनके स्वास्थ्य, पोषण, संरक्षण, पूर्व प्राथमिक शिक्षा व विकास को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से बेहतर बनाया जा रहा है।

महिला एवं बाल विकास विभाग ने अपने संकल्प को सुनिश्चित करने हेतु राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2006 घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006, राजस्थान डायन प्रताडना अधिनियम, 2015, कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीडन एवं राजस्थान सामूहिम विवाह नियमन एवं अनुदान नियम, 2009 जैसे विभिन्न सामाजिक विधान लागू किये गये है।

विभाग द्वारा उक्त विधानों के प्रति महिलाओं एवं समाज के विभिन्न सदस्यों को जागरूक किया जा रहा है ताकि उक्त विधानों के प्रावधानों का वास्तविक लाभ प्राप्त हो सके।.