Website Last Updated on October 18, 2018      
Schemes - Women Empowerment
जैंडर संवेदनशील बजटिंग–
जैण्डर की अवधारणा एवं विकास
महिला विकास और सशक्तिकरण हेतु अभी तक महिलाओं के हित के लिए जितने भी कार्यक्रम बनाए गए हैं या उनके लिए कार्यक्रमों में पृथक से विशेष प्रावधान किए गए हैं, उनका महिलाओं की स्थिति पर कोई सार्थक प्रभाव नहीं पडा है। नवीन अवधारणा के अनुसार बजट का आवंटन वर्ग आधारित होने की अपेक्षा जैण्डनर आधारित होना अधिक महत्वरपूर्ण और सार्थक है ताकि सभी वर्गो को समान रूप से विकास का लाभ मिल सके।

इस अवधारणा को सुदृढ आधार देने के ध्येकय से वर्ष 2009-10 में विशेष प्रयास किये गये जिससे कि विभिन्न विभागों के बजट को जैण्डयर आधारित बनाया जा सके। इस हेतु माननीय मुख्यवमंत्री महोदय द्वारा बजट घोषणा वर्ष 2009-10 में महिलाओं से संबंधित योजनाओं के क्रियान्व्यन की मॉनिटरिंग करने के‍ लिए जैण्डरर रेस्पोओन्सिव बजट बनाने का निर्णय लिया गया जिसके अन्त र्गत प्रत्येंक विभाग के बजट का जैण्डैर आधारित विश्लेेषण संभव हो सकेगा। मुख्यन सचिव जी की अध्य्क्षता में एक उच्चा स्तिरीय समिति का गठन दिनांक 28.08.09 को किया गया हैं जिसमें अति0 मुख्यं सचिव वित्त प्रमुख शासन सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग, एवं आयोजना विभाग सदस्यर है। आयुक्त‍ एवं सचिव, महिला अधिकारिता इस समिति की सदस्य सचिव है। वर्ष 2009-10 के अन्ततर्गत उपरोक्त सोच को और अग्रसर करने के क्रम में राज्या के बजट को जैण्ड रोन्मु्खी बनाने के उद्देश्यत से महिला अधिकारिता विभाग में जैण्डरर प्रकोष्ठट की स्थारपना की गयी है।

उच्च स्तमरीय समिति की प्रथम बैठक दिनांक 22.10.09 को आयोजित की गई। बैठक में लिये गये निर्णनयानुसार पशुपालन विभाग, कृषि विभाग, चिकित्साय एवं स्वाेस्य्को विभाग, सामाजिक न्या य एवं अधिकारिता विभागों का जैण्ड र आधारित बजट बनाने के उद्देश्यए से आयोजना विभाग द्वारा वित्तय विभाग एवं संबंधित विभागों से विचार विमर्श उपरान्तज निर्धारित प्रपत्र में सभी संबंधित विभागों से सूचना प्राप्तभ की गई जिसके आधार पर कृषि विभाग एवं शिक्षा विभाग के बजट की जैण्डोर आधारित समीक्षा दिनांक 16.03.10 को आयोजित हुई एवं प्रगति प्रतिवेदन वर्ष 2010-11 में दिनांक 30.04.10 एवं 21.01.11 को सामाजिक न्याुय एवं अधिकारिता विभाग, पशुपालना विभाग, समेकित बाल विकास सेवाएं, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभागों की उच्चअ स्तारीय बैठक आयोजित की गई। राज्यव सरकार जैण्डीर रेस्पोान्सिव बजटिंग को एक संस्था्त्मरक रूप देने पर विचार कर रही है ताकि समय-समय पर संबंधित विभागों को सही दिशा-निर्देश दिए जा सकें। राज्य सरकार द्वारा जैण्डसर संवेदनशील बजटिंग की ओर निरन्त-र प्रयास किए जा रहे हैं।

पूर्व वर्ष 2005-06 में 6 विभागों यथा स्वा-स्य्या , शिक्षा, कृषि, महिला एवं बाल विकास, मुद्रांक एवं पंजीयन तथा सामाजिक न्या य एवं अधिकारिता विभाग के बजट का आकंलन करवाये जाने का निर्णय लिया गया। तत्पिश्चाेत वर्ष 2006-07 में 8 और विभागों यथा ग्रामीण विकास, स्वा यत्ता शासन, जनजाति क्षेत्र विभाग, उद्योग विभाग, सहकारिता विभाग, वन विभाग, पशुपालन एवं उद्यान विभाग के बजट का जैण्ड‍र आधारित अंकेक्षण किया गया। इस प्रकार 14 विभागों का जैण्डदर आधारित विश्लेैषण मूल्यां कन विभाग द्वारा किया गया हैं।

इसके अतिरिक्तर जिलों में बनायी जाने वाली जिला योजना में जैण्डार सबप्ला न सम्म लित करने के ध्येतय से प्रयोगात्म क रूप में वर्ष 2009-10 में जिला पाली एवं अजमेर में जैण्ड र सबप्लाेन तैयार करवाया गया। जैण्डनर संवेदनशील बजट की अवधारणा को विकसित करने तथा प्रावधानों को सभी विभागों में लागू करने हेतु प्रशिक्षण एवं कार्यशालाएं भी आयोजित की जाती रही है।

प्रगति प्रतिवेदन वर्ष 2010-11 में सभी विभागों में जैण्डभर डेस्कत की स्थाेपना एवं नोडल ऑफिसर नियुक्ते किये जा रहे है ताकि जैण्डेर संबंधित विषयों हेतु विभागों में जैण्ड‍र डेस्क‍ एक फोकल पाईन्टव के रूप में कार्य कर सके।
जैण्डर प्रकोष्ठि के कार्य एवं उद्देश्य
अ- जैण्डरर रेस्पो न्सिव बजटिंग
1. विभिन्न् विभागों के बजट प्रावधानों को संकलित कर जैण्डयर दृष्टिकोण के आधार पर विश्लेनषण करना
2. विभिन्नण विभागों की योजनाओं में उन क्षेत्रों को ज्ञात कर चिन्हित करना जिनमें जैण्डशर रेस्पोनन्सिव बजटिंग (जीआरबी) पर विशेष ध्याडन देने की आवश्यमकता है एवं विभागों को अपने उद्देश्यो की प्राप्ति हेतु उन चिन्हित क्षेत्रों के लिए बजट आवंटित करने में सहायता प्रदान करना।
3. विभागों द्वारा क्रियान्विति की जाने वाली योजनाओं/कार्यक्रमों की जैण्डहर आवश्य कता एवं उपयोगिता को सुनिश्चित करने हेतु समीक्षा करना।
4. विभिन्नि विभागों में जैण्डार प्रकोष्ठल की स्थाीपना करना तथा इस प्रकोष्ठत के अधिकारियों/कर्मचारियों को जीआरबी एवं जैण्ड्र संबंधित प्रशिक्षण प्रदान करवाना ताकि विभागों में उक्तक प्रकोष्ठर, महिलाओं से संबंधित विषयों के लिए केन्द्र के रूप में कार्य कर सके।
5. जैण्डेर रेस्पो न्सिव बजट बनाने में विभिन्ने तकनिकों को विकसित कर विभिन्नर विभागों को तकनिकी सहायता उपलब्धड कराना।
6. जीआरबी तथा जैण्ड‍र से संबंधित मुद्दों पर प्रशिक्षण।
7. जीआरबी तथा जैण्डकर से संबंधित विषयों पर अनुसंधान/डाक्यूकमेन्टेिशन को प्रोत्सा हन देना।
8. विभिन्नत विभागों के लिंग आधारित सांख्यिकी आंकडों का संकलन एवं विश्लेवषण में विभागों की सहायता करना।
ब - महिला अधिकारों का संरक्षण
1. विभिन्नत नीतियों एवं विधानों के क्रियान्व यन का प्रबोधन एवं समन्व‍यन करना।
2. महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने हेतु प्रचार प्रसार की सामग्री विकसित करना एवं विद्यमान कानूनों एवं महिलाओं की सुरक्षा तथा लाभ प्रदान करने हेतु उपलब्ध साधनों को विकसित करना।
3. विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों में जैण्ड्र संवेदनशीलता हेतु विभिन्न विभागों एवं गैर सरकारी संस्था्ओं के साथ विचार विमर्श करना तथा जैण्ड र समानता एवं न्या य को प्रोन्नसत करना।
4. विभि‍न्न। कानूनों नीतियों एवं विधानों में आवश्यसक संशोधन करवाना।
5. महिलाओं का विकास एवं सशक्तिकरण हेतु विभिन्नव योजनाओं एवं कार्यक्रमों का निर्माण करने में सहयोग करना तथा उन्हेंश तकनीकि मार्गदर्शन प्रदान करना।
6. महिलाओं के विकास एवं सशक्तिकरण के उद्देश्य् से लागू किये गये कार्यक्रमों के प्रबोधन के लिए ढांचा स्थाेपित करना।
7. विभिन्नथ स्त रों पर कार्मिकों के लिए योजनाओं का निर्माण करना तथा इन्हेंक लागू करवाना तथा उन्हेंे प्रशिक्षण प्रदान करना।
8. महिला विकास कार्यक्रमों को विकसित एवं सुदृढ करना तथा उन्हेंं महिलाओं के लिए सुगम बनाना।