Website Last Updated on August 16, 2018      
Schemes - ICDS
सहभागिता

चिकित्सा‍ एवं स्वास्थय विभाग के साथ सामंजस्यम :-
समेकित बाल विकास सेवाऐं की 4 सेवा यथा- टीकाकरण, स्वाहस्य्ं जांच,पोषण एवं स्वा स्य्के शिक्षा तथा संदर्भ सेवाऐं चिकित्सा एवं स्वासथ्या विभाग के सहयोग से समुदाय को दी जा रही है। जो उक्तऐ चारों सेवाओं में दोनों विभागों को मदद करती है। मुख्यक रूप से निम्नोलिखित कार्यो पर चिकित्साव विभाग से सामंजस्य बना हुआ है।
  • आशा सहयोगिनियों का चयन, प्रशिक्षण एवं मॉनिटरिंग
  • मात-शिशु स्वास्थय व एवं पोषण दिवस
    • सभी केन्द्रों पर माइक्रोप्ला‍न को संशोधन किया गया और प्रयास किया जा रहा है कि सभी मात-शिशु स्वास्थय एवं पोषण के दिन ए-एन-एम- पहुचे।
    • स्वा-स्य् ु जांच के लिये टेबल, पर्दा, बी--पी- यंत्र तथा हयूमोनोग्लो्मीटर व गर्भवती महिलाओं को टेबल केन्द्रों पर पहूंचने लग गये है। आशा सहयोगिनियों को तौलने के लिये बच्चों् की वजन मशीन दी गई है। इसके अतिरिक्तो ब्लेडप्रेशर आदि जांचने की व्यनवस्थाइ भी सुदढ हुई है।
    • इस दिन केन्द्रों पर एएनएम उपस्थित होती है तथा स्वास्थय एवं चिकित्सार विभाग आवश्येकतानुसार टीके उपलब्धत करवाता है। और वह टीके एएनएम द्वारा गर्भवती, एक वर्ष से छोटे बच्चों को लगाये जाते है।
    • गर्भवती, बीमार तथा अतिकुपोषित बच्चों की जांच एएनएम द्वारा करवाई जाती है।
    • ग्रामीण स्वागस्थीय एवं स्विच्छ‍ता समिति की बैठक में दोंनों विभागों का सहयोग रहता है।
    • किशोर बालिकाओं की दो मासिक बैठक की जाती है।
    • वर्तमान में 80 प्रतिशत आंगनबाडी केन्द्रों पर मात-शिशु स्वावस्य् क एवं पोषण दिवस के दिन एएनएम पहुंच रही है।
कुपोषण उपाचार केन्द्र(MTC):-
अतिकुपोषित बच्चोंम को विश्वा स्वा स्य् संगठन के प्रोटोकोल के अनुसार देखभाल और चिकि‍त्सा) दिये जाने के लिये यूनिसेफ के सहयोग से 7 जिलों में यथा - राजसमन्द, बारां, धौलपुर, अलवर, टोक, व जोधपुर के जिला अस्पसतालों में कुपोषण उपचार केन्द्री की स्थानपना की। अलवर में राजगढ तथा बारां में शाहबाद में एक-एक सामुदायिक स्वाकस्य्न केन्द्रों पर खोले गये।

कुपोषण उपचार केन्द्र में भर्ती हुए अतिकुपोषित बच्चो को समस्त परीक्षण एवं उपचार निशुल्क किया जाता है। तथा जो अभिभावक इनके साथ होता है, उसको 135/- रूपये प्रतिदिन के हिसाब से दिया जाता है। आगनबाडी केन्द्र जिस भी बच्चे3 को कुपोषण उपचार केन्द्र हेतु संदर्भित करती है, उसे आवश्य्क रूप से कुपोषण उपचार केन्द्रक पर भर्ती करना होता है तथा चिकित्स्क आवश्य्कतानुसार उसको उपचार केन्द्र पर भर्ती कर उसका कउपचार करते है, किन्तु 24 घण्टे से पहले किसी भी बच्चे को उपचार केन्द्र से वापिस नहीं भेजा जाता है।

इन 9 केन्द्रों की सफलता के आधार पर राष्ट्री य ग्रामीण स्वारस्य्ही मिशन ने राज्य के शेष 26 जिलों तथा मेडिकल कॉलेज से संबंधित अस्पउतालों में उपचार केन्द्रन की स्थापना सत्र 2009-10 में की और अब यह 100 सामुदायिक स्वादस्य्र केन्द्रों पर और स्थातपित किये जा रहे है।

कुपोषण उपचार केन्द्र से छुटटी मिलने पर बच्चे को पुन 15 दिन बाद दिखाना पडता है ताकि यदि कोई उपचार में कमी रह गई होगी तो उसकी पूर्ति की जाये।
सर्व शिक्षा अभियान:-
  • सर्व शिक्षा अभियान के तहत आंगनबाडी केन्द्रों के लिये पूर्व प्राथमिक शिक्षा हेतु सामग्री दिये जाने का प्रावधान है। इसके तहत हर वर्ष आयुक्तर, राजस्थामन प्रारम्भिक शिक्षा परिषद के साथ बैठक होती है और जाने वाली सामग्री के विषय में निर्णय लिया जाता है। यह भी तय किया गया है कि जो केन्द्र विधालय में चल रहे है, वहां का प्रधानाध्यातपक एक सेन्टर के रूप में केन्द्र् पर सहयोग प्रदान करेगा।
  • जो केन्द्र किराये के या खुले में चल रहे है, उन केन्द्रों को विधालय में स्थानांतरित किया जाना है।
विश्व खाद्य कार्यक्रम प्रशाखा
संयुक्तध राष्ट्रक विश्वे खाद्य कार्यक्रम द्वारा न्यूप कन्ट्री। प्रोग्राम 10573.0 जो कि वित्तीतय वर्ष 2008-09 से प्रभावी हुआ है के अंतगर्त राज्य के मात्र बांसवाडा जिले की समस्ती 9 बाल विकास परियोजनाओं के अधीन वर्ष 2010-11 में स्वी क़ृत एवं संचालित 1928 आंगनबाडी केन्द्रों एवं 132 मिनी आंगनबाडी केन्द्रों़ इस प्रकार कुल 2060 आंगनबाडी केन्दोंं के पंजीकृत 142024 लाभांवितों को पूरक पोषाहार सेवा से लाभान्वित किया जा रहा है ।
विश्व खाद्य कार्यक्रम द्वारा उपलब्धह कराया जा रहा पोषाहार:-
विश्व खाद्य कार्यक्रम द्वारा वर्तमान में पोषाहार के रूप में मीठा इण्डिया मिक्स2 पोषाहार स्थावनीय आपूर्तिकर्ता फर्मों (जयपुर/उदयपुर स्थ्िाकत) के माध्य‍म से उपलब्धर कराया जा रहा हैं। इंडिया मिक्सो पोषाहार 50:गेहूं 25: तेलयुक्ता सोयाबीन एवं 25: शुगर का मिश्रण है। इसमें सादे आटे कि तुलना में उर्जा प्रोटिन एवं वसा की मात्रा अधिक होती है। इंडिया मिक्सस पोषाहार को और अधिक संपुष्ट करने के लिये इसमें आवश्य क माईक्रोन्यूहट्रियेन्टास मिलाए जाते है। इंडिया मिक्स् पोषाहार के प्रति 100 ग्राम में प्रोटिन 16 ग्राम, वसा 6 ग्राम, उर्जा 380 एवं अन्य‍ माईक्रोन्यूिट्रियेन्टमस तत्वि पर्याप्तट मात्रा में पाए जाते है। वितरण के मापदण्डय:- भारत सरकार के पत्र दिनांक 24.02.2009 के द्वारा समेकित बाल विकास सेवाओं के अन्तहगर्त दिये जा रहे पूरक पोषाहार के सम्ब.न्धत में संशोधित न्यू ट्रेशन मापदण्डत निर्धारित किये गये है जिसकी अनुपालना में विश्वध खाद्य कार्यक्रम द्वारा राज्यर को उपलब्धि करवाये इंडिया मिक्स पोषाहार के संशोधित वितरण मापदण्डर निम्नारनुसार निर्धारित है ताकि लाभांवितों को न्यूनतम 500 उर्जा (किलो कैलोरी में) एवं 12-15 ग्राम प्रोटिन प्राप्त हो सके।
  • 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों2 के लिये 135 ग्राम इंडिया मिक्सह पोषाहार प्रति ग्राम लाभान्वित प्रतिदिन सप्‍ताह में 6 दिन
  • 6 माह से 6 वर्ष तक के अतिकुपोषित बच्चों के लिये 215 ग्राम इंडिया मिक्स पोषाहार प्रति ग्राम लाभान्वित प्रतिदिन सप्ताबह में 6 दिन
  • गर्भवती व धात्री महिलाओं को 160 ग्राम इंडिया मिक्सं पोषाहार प्रति ग्राम लाभान्वित प्रतिदिन सप्ता ह में 6 दिन
इंडिया मिक्सर पोषाहार को आंगनबाडी केन्द्रोंन पर वितरण तक की प्रक्रिया :-
विश्वा खाद्य कार्यक्रम वर्तमान में राज्य् के मात्र बांसवाडा जिले की समस्तत नौ बाल विकास परि‍योजनाओं के अधीन स्वींकृति व संचलित समस्तं 2060 आंगनबाडी/मिनी आंगनबाडी केन्द्रोंी पर पंजीकृत लाभांवितों को पूरक पोषाषाहार के रूप इंडिया मिक्सम पोषाहार उपलध करावा गया है।

विश्वं खाद्य कार्यक्रम इंडिया मिक्सव पोषाहार स्थातनीय आपूर्तिकर्तां फर्मों के माध्यंम से उपलब्धय करवा रहा है। आपूर्तिकर्तां फर्मों का चयन विश्वि खाद्य कार्यक्रम द्वारा स्वलयं के स्त र से किया जाता है। आपूर्तिकर्ता फर्मों का चयन विश्वम खाद्य कार्यक्रम द्वारा स्व्यं के स्त र पर किया जाता है। विश्वू खाद्य कार्यक्रम द्वारा आपूर्तिकर्ता फर्मों से बार्टर अनुबन्धे (Barter Agreement) किया जाता है। अनुबन्धक होने पर आपूर्तिकर्तां फर्म आवंटित इण्डिया मिक्सव पोषाहार को अपनी फैक्ट्री में तैयार करता है। तैयार होने पर 100 मैं.टन इण्डिया मिक्सी पोषाहार का एक बैच निर्धारित करके, विश्वै खाद्य कार्यक्रम द्वारा अनुबन्धित लेबोरेट्री से सेम्पचलिंग करवाई जाती है। सेम्पयलिंग के रिजल्टर 5-7 दिन में प्राप्ता होते है। टैस्टच में पोषाहार उपयुक्तस पाये जाने पर फर्म निदेशालय में अनुमोदित स्टॉ्क की सूचना प्रस्तु त कर डी.आई.(Despatch instructions) जारी करने का अनुरोध करती है। फर्म से अनुमोदित स्टॉरक की सूचना प्राप्तD होने पर अनुमोदित स्टॉ्क की सीमा तक इण्डिया मिक्सॉ पोषाहार की डी.आई. मांग के अनुसार जारी कर विभाग से अनुबन्धित परिवहनकर्ता फर्म को निर्देशित किया जाता है कि डी.आई. में उल्लेुखित इण्डिया मिक्सो पोषाहार मात्रा विश्वह खाद्य कार्यक्रम से अनुबन्धित आपूर्तिकर्ता फर्म से प्राप्तक कर उल्लेहखित परियोजना स्त र/गोदाम स्तिर पर परिवहन कर सुपुर्द करावे, यहॉ यह भी उल्लेाखनीय है कि इण्डिया मिक्सर पोषाहार के परिवहन (लोडिंग) का समस्तल कार्य विश्व खाद्य कार्यक्रम से अनुबन्धित जॉच एजेन्सीव के निरीक्षक की उपस्थिति में उसकी देखरेख में किया जाता है।

परियोजना स्त र पर इण्डिया मिक्सी पोषाहार पाप्तख होने पर परियोजनाओं से आंगनबाडी केन्द्रों तक उप दनिदेशक, आईसीडीएस, बांसवाडा से अनुबन्धि परिवहनकर्ता फर्म द्वारा परिवहन कर सुपुर्द किया जाता है एवं आंगनबाडी केन्द्रों पर पोषाहार का नि:शुल्कन वितरण निर्धारित मापदण्डग के अनुसार किया जाता है। 3 से 6 वर्ष तक के बच्चोंर को आंगनबाडी केन्द्रों पर साप्ताजहिक मीन्यूफ के अनुसार पोषाहार तैयार कर नि:शुल्के वितरण किया जाता है।
विभाग द्वारा उपलब्धव करवाए गये गेहॅू की स्थिति:-
विश्व खाद्य कार्यक्रम द्वारा आपूर्तिकर्ता फर्मों का चयन उनके स्वरयं के स्तार से किया जा कर उनसे बार्टर अनुबन्धद (Barter Agreement) किया जाता है। अनुबन्धा में उल्लेरखित बार्टर रेट का 50 प्रतिशत गेहॅू मात्रा सम्बिन्धि फर्म को विश्वस खाद्य कार्यक्रम, नई दिल्लीर द्वारा उपलब्धप करवाई जाती है तथा शेष 50 प्रतिशत गेहॅू सम्बरन्धित आपूर्तिकर्ता फर्म से प्राप्तध इण्डिया मिक्स पोषाहार की एवज में विभाग द्वारा उपलब्ध करवाया जाता है जिसकी लागत एवं अन्य‍ स्थामनीय करों की समस्ता राशि विभाग द्वारा वहन की जाती है।
गेहॅ का व्यतय भार :-
खाद्य (आयोजना व्यमय) मद से चार्ज किया जाता है जिससे स्थाूनीय पोषाहार का व्य:य भी चार्ज किया जाता है। विभाग द्वारा गेहॅू का आंवटन गेहॅू आधारित पोषाहार कार्यक्रम (WBNP) के अन्तैगर्त भारत सरकार से रियायती दर रूपये 415 प्रति क्विन्टील पर प्रतिवर्ष मांगानुसार करवाया जाता है तथा गेहॅू संबंधित फर्मं को केवल भारतीय खाद्य निगम के माध्यरम से ही उपलब्धय करवाये जाते है।
पोषाहार की परिवहन व्यकवस्था:-
आपूर्तिकर्ता फर्म के गोदाम से आंगनबाडी केन्द्रों तक पोषाहार परिवहन की जिम्मेादारी राज्य‍ सरकार की है। पोषाहार परिवहन का व्यय भार राज्य् सरकार द्वारा किया जाता है।
बांसवाडा जिले के तलवाडा ब्लॉ‍क में स्वकयं सहायता समूह (SHG) प्रोजेक्टी (लघु उत्पाद इकाई):
राजस्था न राज्यव में बांसवाडा जिले के तलवाडा प्रोजेक्टप के अन्तमर्गत विश्वर खाद्य कार्यक्रम द्वारा लघु उत्पा‍दन इकाई (SHG) पायलेट प्रोजेक्ट‍ / यूनिट स्थायपित करने हेतु राज्ये सरकार की स्वीडकृति के सम्बयन्धे में बैठक दिनांक 4.05.2010 में WFP द्वारा प्रस्तु त कार्य योजना के आधार पर प्रदान की गई थी, जिसमें निम्नथलिखित शर्ते थी-
  • प्रथम चरण में बांसवाडा व डूंगरपुर जिलो में 3 परियोजनाओं की स्वी क़ति प्रदान की गई। इन परियोजनाओं हेतु WFP द्वारा किराये पर जगह उपलब्धआ करवाई जायेगी तथा जिसके समस्तज व्य य WFP द्वारा वहन किये जायेंगे! इन परियोजनाओं के सुचारू रूप से संचालित होने पर विभाग द्वारा लगभग 4000 स्वाोजनायर फुट प्रति परियोजना नि:शुल्कर भूमि आवंटित की जायेगी।
  • समस्ता आवर्त्तपक व्य य व SHG के लिये रिवालविगं फण्डद परियोजना के आत्म. निर्भर होने तक WEF द्वारा वहन किये जायेगें ।
  • स्वियं सेवी संस्थापओं (NGO) तथा SHG का चयन विभाग से परामर्श करते हुए WEP द्वारा किया जायेगा तथां SHG के सदस्यों0 को सभी प्रकार का प्रशिक्षण WEP द्वारा दिया जायेगा! विभाग द्वारा चयनित समूहों को BPP/APL कोटे का गेहूं (जो भी उपलब्धग हो) समूह के सदस्योंो को कीमतन आवंटित करने में सहायता की जायेगी। विभाग द्वारा तैयार पोषाहार समूह से निर्धारित नॉर्म्सक व नियमानुसार दिया जायेगा।
  • SHG द्वारा पोषाहार तैयार करते समय भारत सरकार द्वारा निर्धारित न्यू.टिशियन्सव नॉर्म्सो की पालना की जायेगी ।
  • लघु उत्पासद इकाई द्वारा अगस्तप 2010 के प्रथम सप्ताूह में उत्पाषदन शुरू कर दिया जायेगा।
यूनिसेफ कार्यक्रम
राज्यक में यूनिसेफ द्वारा समय - समय पर अलग - अलग विभागों के माध्यमम से कई कार्यक्रमों में वित्तीनय सहयोग प्रदान किया जाता है। इन कार्यक्रमों में एवं विभिन्नो विभागों में समन्वोयन हेतु महिला एवं बाल विकास विभाग को नोडल विभाग के रूप में अधिकृत किया गया हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग में यूनिसेफ के सहयोग से न्यूंट्रीशन सैल की स्थावपना की गई है न्यूगटीशन सैल के माध्य म से संचालित यूनिसेफ संपेषित कार्यक्रमों का विवरण निम्ना नुसार है:-
  • विटामिन ए कार्यक्रम:- महिला एवं बाल विकास विभाग, चिकित्सा एवं स्वा.स्य्का विभाग तथा यूनिसेफ द्वारा संयुक्तष रूप से विटामिन – ए एवं पोषण सलाह का विशेष कार्यक्रम विगत 7 वर्ष से संचालित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत महिलाओं को पोषण एवं स्वा स्य्या संबंधी सलाह के साथ 9 माह से 5 वर्ष के बच्चों को आंगनबाडी केन्द्रं पर प्रत्येक 6 माह के अंतराल से विटामिन ए की खुराक पिलाई जाती है। अब तक विटामिन ‘’ए’’ के 26 चरण पूर्ण हो चुके है।
  • आयोडीन विकार एवं निवारण:- इस कार्यक्रम के अंतर्गत आंगनबाडी क्षेत्र में प्रत्ये क माह में 10 घरों में प्रयुक्त् नमक की जांच की जा रही है। विभागीय कार्मिको द्वारा परिवारों/समुदाय को आयोडीन की कमी से होने वाले विकार एवं उन्हें् दूर करने की जानकारी प्रदान की जा रही है।
  • किशोर बालिकाओं में अनीमिया नियन्त्रदण कार्यक्रम – यूनिसेफ के सहयोग से 10 से 19 वर्ष की स्कूल नहीं जाने वाली किशोर बालिकाओं में अनीमिया नियन्त्र ण हेतु कार्यक्रम मार्च 2009 से संचालित किया जा रहा है। कार्यक्रम अंतर्गत जिला एवं सैक्टकर स्तरर के प्रशिक्षण प्रदाय किये गये है तथा उपलब्धयता के आधार पर किशोर बालिकाओं को आई. एफ.ए. गोलियों का वितरण शुरू करवाया गया है।
  • शिशु एवं बाल पोषण व्यिवहार कार्यक्रम (IYCF)- शिशु एवं बच्चोंल की आहार पूर्ति कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक सात जिलों की कुल 10388 आंगनबाडी कार्यकर्ताओं में से 4004 तथा 9319 आशा सहयोगिfuयों में से 1947 आशा सहयोगिनी का प्रशिक्षण एवं एक बैच मेन्टजर प्रशिक्षण करवाया गया है।
  • वृद्वि निगरानी कार्यक्रम – कार्यक्रम में 11 जिलों को जोडा गया है जिसमे प्रथम चरण में 5 एवं द्वितीय चरण में 6 जिलों में प्रशिक्षण हो गये है। कार्यक्रम की नियमित Monitoring की जा रही है।
  • आंगनबाडी पेयजल, स्वाच्छता एवं स्वावलम्बी शिक्षा कार्यक्रम – आंगनबाडी केन्द्रों के माध्यम से माताओं बच्चो् तथा समुदाय तक स्वताछकी के प्रति जागरूकता बढाने तथा आंगनबाडी केन्द्रों पर जल व स्वोच्छता सुविधाओं को बेहतर बनाने व उनके उपयोग व रखरखाव को बढावा देने के उददेश्य से आंगनबाडी जल स्वनच्छखता व स्वास्थय शिक्षा कार्यक्रम चलाया जा रहा है।जिसमें विभागीय अधिकारीयों व जमीनी कार्यकर्ताओं को स्वच्छता व स्वास्य् ी पर प्रशिक्षण/ क्षमतावर्धन प्रदान कर आंगनबाडी केन्द्रों के माध्यम से स्वच्छता व स्वासस्य्डी शिक्षा गतिविधियॉ आयोजित करवाई जा रही है ताकी माताओं व बच्चों मे व्यक्तिगत स्वच्छता आदतें जैसे भोजन से पूर्व तथा शौच के बाद नियमित साबुन से हाथ धोने की आदत, नियमित शौचालयों के उपयोग, सुरक्षित पेयजल का उपयोग व रखरखाव आदि को बढावा प्रदान किया जा सके।