Website Last Updated on June 22, 2018      
Services - ICDS
पोषाहार तथा स्वास्थ्य शिक्षा–
आंगनबाडी केन्द्र पर यह सेवा परिवार के सदस्यों को गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, नवजात शिशु तथा 6 वर्ष तक के बच्चों की पोषण एवं स्वास्थ्य सबंधी देखरेख के विषय में सक्षम बनाया जाता है। इसके अंतर्गत निम्न लिखित बिन्दुओं के आधार पर परिवार के सदस्यों को परामर्श दिया जाता है।
  • किशोर बालिकाओं को जीवन कौशल, साफ-सफाई, शिक्षा, आईएफए की गोली खाने से होने वाले लाभ आदि के परामर्श दिये जाते है।
  • गर्भवती महिला को गर्भ का पता चलते ही टीटनेस का एक टीका लगाना चाहिये तथा उसके एक माह बाद टीटनेस का दूसरा टीका लगाना चाहिये। यदि पूर्व प्रसव के समय दो टीके लग गये हो और 3 वर्ष से पूर्व धारण कर लिया हो तो एक बूस्टसर टीका लगाने से बच्चेा व मॉ को ताण की बीमारी से छुटकारा मिल जाता है।
  • गर्भावस्था के दौरान गर्भवती स्त्री की जांच कम से कम तीन बार अवश्य करवानी चाहिये।
  • गर्भवती महिला को अधिक मात्रा में भोजन करना चाहिये – सामान्य आहार से लगभग एक चौथाई ज्यादा। उसे रात में 8 घंटे की नींद के अलावा दिन में भी 2 घंटे विश्राम करना चाहिए।
  • गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान कम से कम तीन तक प्रतिदिन आयरन फॉलिक एसिड की गोली- कुल सौ गोलियां जरूर लेनी चाहिये जिससे उसका हीमोग्लोगबिन स्तसर 12जी/डीएल तक बना रहे।
  • जहां तक हो सके प्रसव अस्पताल में ही करवाना चाहिये।
  • जन्म के तुरंत बाद स्तनपान शुरू कर देना चाहिये- एक घण्टे के अंदर ।
  • नवजात शिशु को सबसे पहले निकलने वाला पीला दूध – कॉलोस्ट्रतम जरूर पिलाना चाहिये, क्योंलकि उसमें संक्रमणरोधी गुण और पोषक तत्व‍ होते है।
  • पहले छ महीने तक बच्चेल को सिर्फ स्त्नपान करायें। जो कोई आहार या पेय पदार्थ, यहां तक कि पानी न दें।
  • छ माह पूरे हो जाने पर पूरक आहार शुरू करें। बच्चेत को थोडी-थोडी मात्रा में दाल हरी पत्ते दार सब्जियां, मुलायम मसले हुए अनाज, पीले और नारंगी मौसमी फल भी खिलाना प्रारंभ करें। इसके साथ-साथ स्तमनपान दो साल या उसके बाद भी जारी रखें।
  • वृद्वि पर निगरानी एक बहुत उपयोगी उपकरण है जिसके द्वारा आंगनबाडी कार्यकर्ता/मां, बच्चेो की बद्वि में कमी या अपर्याप्तय पोषण के विषय में जान सकती है। हर महीने आंगनबाडी केन्द्रह पर अपने बच्चेव का‍ नियमित रूप से वजन कराएं।
  • आयोडीन कमी को रोकने के लिये पूरे परिवार हेतु आयोडीनयुक्तर नमक का ही प्रयोग करें।
  • पूरे साल में शिशु को सभी जरूरी टीके लगवाएं जिससे उसका उन जानलेवा बीमारियों से बचाव हो सके जो असामान्य वृद्वि, विकलांगता या मृत्युम का कारण बन सकती है।
  • बीमारी से बच्चे की सामान्य वृद्धि और विकास पर असर पड सकता है। बीमारी के दौरान, यहां तक कि दस्तट लगने पर भी बच्चेर को स्तपनपान कराते रहें।
  • बीमारियों से बचने के लिये बच्चों स्वगच्छचता संबंधित आदतें विकसित करें तथा भोजन व पानी को साफ रखें ।
  • बच्चों के साथ खेलने, बात करने तथा उन्हेंत उचित आहार देने से उनका समुचित वृद्धि और विकास होता है।
  • मस्तिष्का का विकास पहले दो साल में तेजी से होता है। इसलिये छोटे बच्चों को उत्ते‍जित करने हेतु, दूसरों के साथ खेलने कूदने, इधर-उधर चलने, तथा देखने, छूने व समझने के लिये चीजें दी जानी चाहिये।
  • बच्चे के विकास में पिता एक अहम भूमिका निभाते है, इसलिये उन्हेंआ भी बच्चें के लालन-पालन में पूरा हाथ बटाना चाहिए।
  • बच्चे के साथ बात करके, उसकी बात सुनकर और उसके साथ खेलकर उसे संचार करना सिखाएं।
  • जब बच्चे अपनी देखभाल करने वालों के साथ सुरक्षित और उत्सालहजनक माहौल में होते है। मां, पिता और भाई-बहन सभी बच्चेु की देखभाल करके और उसके खेलकर उसके विकास में योगदान दे सकते है।
  • बच्चों का शारीरिक चोट भावनात्मोक तनाव (हिंसा या गुस्सेक के कारण) से बच्चेक रहने से उनमें खोज कर सीखने-समझने के लिये आत्मषविश्वासस बढता है।
  • बच्चों को खेलने और खोज करके सीखने के लिये प्रोत्सा्हित करें क्योेकि इससे उन्हें सामाजिक, भावनात्म्क, शारीरिक और बौद्वि‍क तौर पर सीखने और विकसित होने में मदद मिलती है।
  • खेलना ही बच्चों का काम है। इससे उन्हैा सीखने और समस्याशयें हल करने की क्षमता विकसित करने के सारे मौके मिलते है। बच्चेह चीजों को आजमा कर तथा औरों करते हुए देखकर सीखते है।
  • सभी बच्चे एक खास आयु तक खास तरह के काम करना सीखते है। जिन्हें विकास संबंधी चरण कहा जाता है जैसे कि मुस्कु राना बिना सहारे के बैठना घ्रिसट कर चलना आदि।यदि किसी खास चरण में पहुंचने में देरी हो रही है या बच्चे की प्रगति धीमी दिखाई दे रही हो तो उसका आहार, उसक साथ बातचीत और उसके साथ खेलने पर ज्याीदा ध्या न दें। यदि बच्चाा इसके बावजूद नहीं बढ रहा है तो उसे डॉक्टिर के पास ले जाएं।
  • बच्चे की सर्वोत्तटम बद्वि और विकास के लिये उसे अच्छेर पोषण स्वा स्य्ढ की देखभाल के अलावा प्या र, ध्याोन व उत्सा्हजनक माहौल दें।