Department of Women and Child Development, Rajasthan  
Department of Women and Child Development, Rajasthan
Department of Women and Child Development, India  
 
Other ICDS Links
Introduction
Acts and Rules
Orders and Circulars
State Child Policy
Reports
Important Forms
About Us | Organisational Setup | Tender and Notices | Circular and Orders | Citizen Charter | Rights to Information | News & Events | Contact Us
 
पूरक पोषाहार–
बच्चो एवं महिलाओं में कुपोषण की स्थिति में सुधार हेतु बाल विकास परियोजनाओं के अधीन संचालित आंगनबाडी केन्द्रों पर वर्ष में 300 दिन पंजीकृत लाभान्वितों को पूरक पोषाहार का वितरण किया जा रहा है, ताकि बच्चों एवं महिलाओं को वांछित न्यूनतम प्रोटीन एवं ऊर्जा की आंशिक पूर्ति कर उनके पोषण स्तर को सुधारा जा सके। पूरक पोषाहार से इन्हें निम्नानुसार कैलोरी एवं प्रोटीन उपलब्ध होता है।

आंगनबाडी केन्द्रों पर पोषाहार से प्राप्त कैलोरी व प्रोटीन की मात्रा

क्र.सं. लाभार्थी प्रतिदिन प्रति लाभार्थी
कैलोरी प्रोटीन ग्राम
1. 6 माह से 6 वर्ष तक के कुपोषित बच्चे 300 08-10
2. 6 माह से 6 वर्ष तक के अति कुपोषित बच्चे 600 16-20
3. गर्भवती व धात्री महिलाए तथा किशोरी बालिकाए 500 20-25

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण–3 के अनुसार विगत 6–7 वर्षो में राज्य में 3 वर्ष से कम आयु के बच्चों में अल्पवजनता की दर में लगभग 7 प्रतिशत की कमी सर्वेक्षण–2 से दर्ज की गई है। समेकित बाल विकास सेवा कार्यक्रम के अन्तर्गत आंगनबाडी केन्द्रों पर संधारित ग्रोथ चार्टस(वृद्धि निगरानी) एवं प्रतिमाह आंगनबाड़ी केन्द्र पर बच्चों का वजन लेकर उनकी श्रेणी (आयु के अनुपात में वजन के अनुसार कुपोषण स्तर) निर्धारित की जाती है।

पोषाहार वितरण व्यवस्था
राज्य मे एक जिला–एक पोषाहार स्त्रोत की व्यवस्था प्रभावी है। वर्तमान में राज्य के एक मात्र बांसवाडा जिले को विश्व खाद्य कार्यक्रम संपोषित क्षेत्र तथा शेष जिलों को स्थानीय खा़द्य सामग्री के अन्तर्गत रखा गया है। विश्व खाद्य कार्यक्रम से नि:शुल्क प्राप्त इण्डिया मिक्स पोषाहार सामग्री का वितरण किया जा रहा है। इसके पेटे विभाग द्वारा विश्व खाद्य कार्यक्रम को उपलब्ध करवाये गये इण्डिया मिक्स पोषाहार का लगभग 81.50 प्रतिशत गेहू विभाग द्वारा विश्व खाद्य कार्यक्रम से अनुबंधित आपूर्तिकर्ता फर्म को उपलब्ध करवाया जा रहा है।

वित्तीय वर्ष 2006–07 में राज्य के 7 जिलों यथा भरतपुर, झुन्झुनू, पाली, जोधपुर, भीलवाडा, बीकानेर एवं चुरू में केयर संस्था से नि:शुल्क खाद्यान्न सामग्री प्राप्त होती थी। संस्था द्वारा सामग्री आपूर्ति में असमर्थता प्रकट किये जाने के फलस्वरूप इन सभी 7 जिलों को स्थानीय खाद्य सामग्री के अन्तर्गत सम्मिलित कर लिया गया है।

राज्य में आंगनबाडी केन्द्रों पर वास्तविक रूप से उपस्थित सभी 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती एवं धात्री माताओं को पूरक पोषाहार उपलब्ध करवाया जा रहा है। राज्य स्तर से वास्तविक लाभान्वितों की संख्या के दृष्टिगत प्रति आंगनबाड़ी केन्द्र औसतन 100 लाभान्वितों का लक्ष्य मानते हुए पूरक पोषाहार सामग्री का क्रय एवं वितरण आंगनबाड़ी केन्द्रों पर किया जा रहा है।

राज्य के सभी जिलों में आयु वर्ग 6 माह – 3 वर्ष के बच्चो, गर्भवती एवं धात्री माताओं तथा किशोरी बालिकाओं को सीधे ही तैयार खाने योग्य (RTE) बेबी मिक्स/पंजीरी पोषाहार का वितरण राज्य योजनान्तर्गत प्रतिमाह बारी–बारी से किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2006–07 से राज्य के 32 जिलों के सभी आगनबाड़ी केन्द्रों पर (बांसवाडा को छोडकर) 3–6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को गरम तैयार पोषाहार मीठा दलिया अथवा खिचडी प्रतिदिन बारी–बारी से वितरित की जा रही है।

3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए गरम पोषाहार
आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से लाभान्वितों को अधिक स्वादिष्ट एवं रूचिकर पोषाहार उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से विभाग द्वारा 16 नवम्बर, 2005 से प्रत्येक बाल विकास परियोजना के एक–एक परिक्षेत्र में संचालित आंगनबाड़ी केन्द्रों पर महिला स्वयं सहायता समूहों/अन्नपूर्णा महिला सहकारी समितियों/मातृ समितियों के माध्यम से आयु वर्ग 3 से 6 वर्ष के बच्चों को गरम पूरक आहार (मीठा दलिया/नमकीन खिचडी) का वितरण प्रारम्भ किया गया। अब यह व्यवस्था राज्य के 32 जिलों के सभी आंगनबाड़ी केन्द्रो पर (बांसवाड़ा जिले को छोड़कर) लागू की जा चुकी है। इस हेतु प्रत्येक आंगनबाडी केन्द्र के लिए 4 हजार रूपये की स्थाई पेशगी की व्यवस्था आंगनबाडी कार्यकर्ता/स्वयं सहायता समूह/सहकारी समितियों के लिए की गई है। बच्चों को गरम पूरक पोषाहार उपलब्ध करवाने के लिए 3 प्रकार की व्यवस्थाए की गई है:–
  • ऐसे आंगनबाडी केन्द्र जो स्कूल प्रांगण/परिसर में संचालित हैं, उन केन्द्रों पर महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गठित ऐसे महिला स्वयं सहायता समूह जिनका बैंक में खाता खुला हुआ है और गरम पका हुआ भोजन तैयार कर उपलब्ध कराने के लिए सक्षम है, ऐसे समूह के माध्यम से पका हुआ भोजन दिया जा रहा है।
  • ऐसे आंगनबाडी केन्द्र जो स्कूल प्रांगण/परिसर में संचालित नहीं है एवं इन केन्द्रों पर सहकारिता विभाग द्वारा चयनित अन्नपूर्णा महिला सहकारी समिति उपलब्ध है तो ऐसे केन्द्रों पर गरम पूरक पोषाहार की व्यवस्था अन्नपूर्णा महिला सहकारी समिति के माध्यम से की जा रही है। अन्नपूर्णा महिला सहकारी समिति के माध्यम से यह व्यवस्था प्रत्येक पंचायत समिति में दो ग्राम पंचायतों के अन्तर्गत संचालित आंगनबाडी केन्द्रों हेतु की जा रही है।
  • शेष अन्य आंगनबाडी केन्द्रों पर मातृ समिति की देखरेख में आंगनबाडी कार्यकर्ता/सहायिका के द्वारा स्थानीय स्तर पर सामग्री क्रय कर पोषाहार तैयार किया जाकर लाभान्वितों को उपलब्ध कराया जा रहा है।

शहरी गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के लिए "सुराज" योजना
शहरी क्षेत्रों में आर्थिक रूप से पिछडे परिवारों की गर्भवती एवं धात्री माताओं के स्वास्थ्य एवं पोषाहार स्तर में सुधार हेतु सुराज योजना के अन्तर्गत 15 अगस्त, 2006 से महिला एवं बाल विकास विभाग तथा नगरीय विकास विभाग द्वारा संयुक्त रूप से 376 आंगनबाड़ी केन्द्रों पर इन महिलाओं को गरम भोजन (पोषाहार) उपलब्ध करवाया जाना प्रारम्भ किया गया। अब यह कार्यक्रम 10 शहरी परियोजना क्षेत्रों के लगभग 1 हजार 700 आंगनबाड़ी केन्द्रों पर लागु है। प्रति दिन लगभग 20 हजार गर्भवती एवं धात्री माताओं को लाभान्वित किया जा रहा हैं। इस योजना में पूरक पोषाहार के अन्तर्गत खिचडी, दलिया एवं हरी सब्जी–दाल–रोटी की व्यवस्था की गई है। पूरक पोषाहार तैयार करने एवं वितरण का कार्य गैर सरकारी संगठनों एवं महिला स्वयं सहायता समूहों को सौपा गया है। इस पोषाहार से प्रति लाभान्वित प्रतिदिन 553 कैलोरी ऊर्जा तथा 16 से 20 ग्राम प्रोटीन प्राप्त हो रहा है। स्वयं सहायता समूहों की लाभ राशि जोडने के उपरान्त इकाई लागत 5.00 रूपये निर्धारित कर 2.00 रूपये की राशि विभाग द्वारा तथा शेष 3.00 रूपये की राशि संबंधित स्थानीय निकाय संस्था द्वारा वहन की जा रही है। यह योजना उदयपुर, भरतपुर, बीकानेर, अजमेर, श्रीगंगानगर, भीलवाडा, अलवर, कोटा, जोधपुर एवं जयपुर शहरों में प्रारम्भ की गई है।

विभाग द्वारा आयु वर्ग 3–6 वर्ष के स्कूल नहीं जाने वाले सभी बच्चों को पूरक पोषाहार से लाभान्वित करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों को भी आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से पोषाहार उपलब्ध करवाने की व्यवस्था लागू की गई है। मिनी आंगनबाड़ी केन्द्रों तथा कम आबादी क्षेत्रों में खोले गये नवीन केन्द्रों के दृष्टिगत मिनी आंगनबाड़ी केन्द्रों के लिए पृथक से पूरक पोषाहार लाभार्थी का लक्ष्य नहीं रखा जाकर उन्हें मुख्य केन्द्र से ही जोड़ा गया है।
 
 
Privacy Policy     Contact Us     SiteMap
© 2008-2012 Department of Women and Child Development. All rights reserved.